तुम ढूंढो मुझे गोपाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुम ढून्ड़ो मुझे गोपाल मैं खोई गईयाँ तेरी

सुध लो मोरी गोपाल मैं खोई गईयाँ तेरी

पांच विकार से हां की जाए

पांच तत्व की ये देही,

पर्वत भटकी दूर कही मैं चैन न पाऊ अब के ही

ये कैसा माया जाल मैं उल्जी गइया तेरी

सुध लो मोरी गोपाल मैं खोई गईयाँ तेरी

यमुना तट न नन्दनं वन न गोपी ग्वाल कोई दिखे

कुसम लता न तेरी छटा न पाक पखेरू कोई दिखे

कब साँझ भई घनश्याम मैं व्याकुल गईयाँ तेरी

तुम ढून्ड़ो मुझे गोपाल मैं खोई गईयाँ तेरी

किट पाऊ तर वर की छाओ जित साजे है कृष्ण कन्हिया

मन का ताप छाप भ्टुकन का तुम ही हरो हे रास रचियाँ

अब मुख निहारु बाट प्रबु जी मैं गईयाँ तेरी

सुध लो मोरी गोपाल मैं खोई गईयाँ तेरी

बंसी के सुर धाग से तेरो मधुर तान से मुझे पुकारो

राधा कृष्ण गोविन्द हरी हर मुरली धर नाम तिहारो

मुझे उभारो हे गोपाल मैं खोई गईयाँ तेरी

तुम ढून्ड़ो मुझे गोपाल मैं खोई गईयाँ तेरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।