तेरे हुँदै दाती मैं क्यों

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे हुँदै दाती मैं क्यों तावा ढेरियाँ

दिल दिया जान दी है सबे मेरी आस

तेरे हुँदै दाती मैं क्यों तावा ढेरियाँ

झुठेया दा झूठ वीके सचेया दा सच न

हीरे ने ता हीरा रेहनालोकी केहन कच माँ

हीरे नु परख लेन अखा तेरियां

तेरे हुँदै दाती मैं क्यों तावा ढेरियाँ

आपे माँ जवाब देवी जिह्ना ने माँ गला कितियाँ

सेह गया जमाने दियां मैं बुलिया भी सीतियाँ,

कुका बस सुनिया ने माँ तो मेरिया

तेरे हुँदै दाती मैं क्यों तावा ढेरियाँ

अपने भी छड गए मेनू मेरे हाल ते

परदे तू कज लये कमले जहां दे

लोड न किसे दी मेनू लोडा तेरियां

तेरे हुँदै दाती मैं क्यों तावा ढेरियाँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।