धोला गिरी पर्वत को सिर पे लेके आये रे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

शक्ति वान लगे लक्ष्मण को व्याकुल हुए राम राई रे

बजरंगी विपदा की घड़ी में तनिक न देर लगाये रे

धोला गिरी पर्वत को सिर पे लेके आये रे

वैद बोले सूर्ये उधे से पेहले यदि आएगा,

मृत संजीवनी बूटी जान को बचाएगा

देर जो हुई जान बचने न पाए रे

धोला गिरी पर्वत को सिर पे लेके आये रे

पर्वत पे संजीवनी पहचान नही पाए रे

बजरंगी पर्वत उखाड़ के ही ले आये ले

संकट मोचन संकट राम प्रभु के मिटाए रे

धोला गिरी पर्वत को सिर पे लेके आये रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।