सत्ये वचन क्यों छोड़ दियां

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॥ पावन पाठ ॥

नाम जपन क्यों छोड़ दियां

क्रोध न छोड़ा झूठ न छोड़ा सत्ये वचन क्यों छोड़ दियां

झूठे जग में दिल ललचा कर असल वचन क्यों छोड़ दियां

कोडी को तो खूब सम्बाला लाल रतन क्यों छोड़ दियां

जिही सुमिरन से अति सुख पावे सो सुमिरन क्यों छोड़ दियां

खालस इक भगवान् भरोसे तन मनधन क्यों छोड़ दियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।