माँ के जैसा जमाने में दानी नही

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ के जैसा जमाने में दानी नही

हकीकत यही है कहानी नही,

कोई घर बता जिसकी माँ ही नही

अपने अंचल में माँ जिसको पा ली नही

माँ के जैसा जमाने में दानी नही

माँ की होती है बचो पे ममता अपार,

अमृत बन के बेहती है आँचल से धार

अपनी नजरो से माँ दूर करती नही

देखते देखते आँख थकती नही

आला चरणों में माँ के चडाया था सिर,

उसे जिन्दा किया और कर दिया अमर,

ध्यानु दर्शा बिना घर को लौटा नही

कोई मायूस महियर में होता नही

माँ के हम पे बहुत सारे एहसान है

ये क्या कम है के हम इक इंसान है

क्यों रधुवीर फिर तू समजता नही

सारी दुनिया में माँ जैसा कोई नही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।