भोले बाबा की सवारी बडी शान से चले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले बाबा की सवारी बडी शान से चले

महादेव त्रिपुरारी बड़े शान से चले

अरे ढोल नगाड़े संग साथ में चले

और बचे बूढ़े दर नाचते चले

भोले बाबा की सवारी बडी शान से चले

आज भगवान चले भगतो के रस्ते

हाल सब का जानने मिल ने के वास्ते

मांग लो जो मांग न है सब देने चले

भोले बाबा की सवारी बडी शान से चले

ना ही कोई राजा है है ना कोई भिखारी

सब के काँधे पे बाबा की सवारी

अरे उच्च नही भेद भाव सब भूल के चले

भोले बाबा की सवारी बडी शान से चले

माथे पे चंदा गले में सर्प माला

कानो में बिछु कुंडन पेहने मर्ग शाला

अरे अपने जटा में गंगा धर के चले

भोले बाबा की सवारी बडी शान से चले

सावन का महीना बड़ा है सुहाना

शिव जी की भक्ति में जग है दीवाना

अरे सावन की रिमझिम में भीग ते चले

भोले बाबा की सवारी बडी शान से चले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।