प्राणी लोक मुझे भी ले चल भोले जोगिया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

प्राणी लोक मुझे भी ले चल भोले जोगिया,

होके नन्द पे सवार जाऊ केलाश पार धरती घुमं दे

पापियों के पाप से भरा है सारा संसार

कही फेला भ्रष्टाचार कही हॉवे अना चार

छुपा स्वार्थ मन में जन जन में

प्राणी लोक मुझे भी ले चल भोले जोगिया

डमरू धर मोहे यु न उलजाओ बातो के इस जाल में

भोली गोरा फस जायगी तू माया नगरी की चाल में

तूने बनाई कैसी धरती जा सकू किसी तान में

जब कोई मन से पुकारे तुझे गोरा

कोई कहे कुछ अगर तब जाना न ठहर जऊ बन ठन के

प्राणी लोक मुझे भी ले चल भोले जोगिया

सुन गोरा धरती पे है छाया ये कलयुग घनघोर हो

नाथ चले जब संग में तो रात भी लगे मुझे कोर हो

सोच ले फिर से बात ये अपनी फिर न होना तंग

ओह्गड़दानी तुझ संग बिताया जीवन नही डर कोई भये ना कोई संशे

पापियों के पाप से भरा है सारा संसार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।