मेरे सांवरे की ये दया का असर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे सांवरे की ये दया का असर है

जहाँ देखता हूँ ये आता नज़र है

मेरे सांवरे की ये ............

नज़र मथुरा काशी मेरी बन गयी हैं

नज़र में छवि श्याम की बस गई है

ाकभु घुमु गोकुल कभी वृन्दावन में

हज़ारों नज़ारें मेरे आज मन में

मेरा मन मुझ ही से यूँ हुआ बेखबर है

मेरे सांवरे की ये ............

कभी मटकियों से वो माखन चूरन

कभी कुंज गलियों में रास रचना

वो छूप छुप के राधे रानी का आना

बताऊँ क्या मंज़र हसीं है सुहाना

बगल राधे रानी और बंसी अधर है

मेरे सांवरे की ये ............

मुझे मिल गया है कृष्ण मुरारी

नज़र से नज़र की हुई बात सारी

बसी मन के अंदर हसीं श्याम सूरत

नहीं है किसी की मुझे अब ज़रूरत

हुआ धन्य शर्मा जो करी ये महर है

मेरे सांवरे की ये ............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।