टूटे ना टूटे ना प्यार की ये डोरियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

टूटे ना टूटे ना प्यार की ये डोरियां

छूटे ना छूटे ना तेरी मेरी ये यारियां

ना रहे ना रहे ना रहे अब कोई दूरियां

चाहे हो चाहे हो चाहे हो जितनी मजबूरियां

चाहत है यही तुझसे मेरे सांवरिया

यूँ ही बानी रहे हम दोनों की नज़दीकियां

टूटे ना ................

मिलती रहे मुझे तेरी कृपा ये जब तक है साँसों में सांस

ये प्यार दिल में धड़कता रहे तेरा हर पल हो ये एहसास

जो आये कभी कोई दुश्वारी मुझपे तो देना दिलासा मुझे

यकी है तेरे होते होगी कभी ना कोई निराशा मुझे

आये ना होंठों पे कभी मेरे ही ये सिसकियाँ

टूटे ना ................

ये दिल तलबगार तेरा हमेशा तुझसे ही मेरा जहां

तेरे ही दम से मेरे श्याम प्यारे हर पल मेरा खुशनुमा

अगर तू ना होता तो होता कहाँ फिर मेरा वजूद यहाँ

तुम्ही से है आबाद जीवन ये मेरा तुम्ही से है मस्त समां

आती है कुंदन को नाम की तेरे ही हिचकियाँ

टूटे ना ............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।