मृग तृष्णा है दुनिया दारी कब तक भागे गा प्राणी

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मृग तृष्णा है दुनिया दारी कब तक भागे गा प्राणी

भीतर ही तेरे वो रब है कब तू जागे गा प्राणी

सुख में भी अब सुख नही मिलता सुविधा में आराम नही

मुख में राम का नाम है लेकिन मन में कही भी राम नही

लोग मोह को काम क्रोध को कब तू त्यागे गा प्राणी

मृग तृष्णा है दुनिया दारी कब तक भागे गा प्राणी

हर सपना साकार न होगा इतनी बात समज ले तू

ये उल्जन आसान न होगी

चाहे लाख उलज ले तू

बस वो ही तुझको ना मिले गा जो तू मांगे गा प्राणी

मृग तृष्णा है दुनिया दारी कब तक भागे गा प्राणी

दुनिया पर इतरा न साहिल अखिर गावह लगाये गी

मरहम जब तू चाहे गा तब नामक भाव बताये गी

दिल को तेरे जगत हमेशा यु ही धागे का प्राणी

मृग तृष्णा है दुनिया दारी कब तक भागे गा प्राणी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।