शिव सतुति

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आशुतोष सशाँक शेखर चन्द्र मौली चिदंबरा,

कोटि कोटि प्रणाम शम्भू कोटि नमन दिगम्बरा,

निर्विकार ओमकार अविनाशी तुम्ही देवाधि देव ,

जगत सर्जक प्रलय करता शिवम सत्यम सुंदरा ,

निरंकार स्वरूप कालेश्वर महा योगीश्वरा ,

दयानिधि दानिश्वर जय जटाधार अभयंकरा,

शूल पानी त्रिशूल धारी औगड़ी बाघम्बरी ,

जय महेश त्रिलोचनाय विश्वनाथ विशम्भरा,

नाथ नागेश्वर हरो हर पाप साप अभिशाप तम,

महादेव महान भोले सदा शिव शिव संकरा,

जगत पति अनुरकती भक्ति सदैव तेरे चरण हो,

क्षमा हो अपराध सब जय जयति जगदीश्वरा,

जनम जीवन जगत का संताप ताप मिटे सभी,

ओम नमः शिवाय मन जपता रहे पञ्चाक्षरा,

आशुतोष सशाँक शेखर चन्द्र मौली चिदम्बरा,

कोटि कोटि प्रणाम संभु कोटि नमन दिगम्बरा,

संतोष जय प्रकाश तिवारी

9139390019

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।