सिया राम लखन वनवास चले दसरथ के दर्द को क्या जाने

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सिया राम लखन वनवास चले दसरथ के दर्द को क्या जाने

आस में सास अटकी थी टूट गई

पिता जी के दर्द को न पहचाने

नैना पथरा गए राहे तक के

मौत आकर खड़ी थी सिर हाने

सिया राम लखन वनवास चले दसरथ के दर्द को क्या जाने

अंतिम ईशा भी न पूरी हुई

कोश्याला लगी अनसु बहाने

कंधा भी नही दे अर्थी को

उलटे लगे संज को समजाने

सिया राम लखन वनवास चले दसरथ के दर्द को क्या जाने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।