पिल्वायदे भंगिया घोट ओ गनपत की मम्मी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पिल्वायदे भंगिया घोट ओ गनपत की मम्मी

घोटे घोट घुमाए दे प्यारी रगडा खूब लगाये दे

पिल्वायदे भंगिया घोट ओ गनपत की मम्मी

दुरक लगी भंगिया की तगडी तने नही इब तक रगड़ी

बुज्वाये दे मन की प्यास ओ गनपत की मम्मी

पिल्वायदे भंगिया घोट

भूतो की फ़ौज से आने वाली फेर नही सब जाने वाली

कर जल्दी हो मत लेट ओ गनपत की मम्मी

पिल्वायदे भंगिया घोट

केलाश पे न मुझको जाना भंगियाँ कना हो न पीना खाना

मैं करता रहूँगा वेट ओ गनपत की मम्मी

पिल्वायदे भंगिया घोट

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।