तेरे ही चरणों में मेरी मथुरा काशी है

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॥ पावन पाठ ॥

साईं बाबा तेरे दर्शन को अखियाँ प्यासी है

तेरे ही चरणों में मेरी मथुरा काशी है

तू सब कुछ जानता है हर भगत ये मानता है,

तेरा दर पे कौन है कैसा साईं पहचान ता है

तेरे चेहरे पे ख़ुशी नही दिखती कभी उदासी है

तेरे ही चरणों में मेरी मथुरा काशी है

शिर्डी में साईं आओ चरनो मे शीश जुकाओ

चरणों में शीश जुका के हर दुःख में भूल जाओ

कन कन में तू ही है वसता घट घट का तू वासी है

तेरे ही चरणों में मेरी मथुरा काशी है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।