तेरे दरबार आया हु

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ मैया खोल दे नैना तेरे दरबार आया हु

तेरे बिन ना मिले चैना तेरा दरबार आया हु

सुना है तेरे चरणों में सवाली रोज आते है

मुरादे मन की कर पूरी याहा से लोग जाते है

बना ले मुझको भी अपना तेरे दर बार आया हु

तेरे आँचल की छाया में मेरा जीवन गुजर जाए

मिले जो तेरी ममता को कोइ अब और क्या चाहे

हां करदे पूरा ये सपना

तेरे दरबार आया हु

कभी माया के घेरे में तेरा सुमिरन न कर पाया

सताये मोक्श की चिंता के मेरा अंत जब आया

मेरा भी मान ले केहना तेरा दरबार आया हु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।