तेरी उची अटरियाँ कैसे आऊ माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी उची अटरियाँ कैसे आऊ माँ,

सनन सनन पावन चले और चले पुरवइयाँ

आऊ के न आऊ ये भी सोच मैं न पाऊ,

दुविदा में बीती मोरी सारी उमेरियां कैसे आऊ माँ,

तेरी उची अटरियाँ कैसे आऊ माँ,

माता तेरी नगरी की पथरीली डगरिया

पथरीली डगरिया मैया टेडी रे डगरिया,

आऊ के न आऊ ये भी सोच मैं न पाऊ,

गफलत में डोये रहू पाप गठरियाँ कैसे आऊ माँ,

तेरी उची अटरियाँ कैसे आऊ माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।