अपनी बिटियाँ नु आगे तक पढाओ जी

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॥ पावन पाठ ॥

मुंडे कुड़ी दे भेद भाव नु मिटाओ जी,

अपनी लाडो नु आगे तक पढाओ जी

नाम करे रोशन गल पल्ले पाओ जी

अपनी बिटियाँ नु आगे तक पढाओ जी

कुढ़िया दे होवन के काहनू आपा दुःख मनाइए

शिख्शा एहना दा भी हक एह लोका नु स्म्जाइये ,

सरकार दे उपराले दा लाभ उठाओ जी

अपनी गुड़ियाँ नु आगे तक पढाओ जी

मुख वेले ओ चुप रेह्न्दी है कली बह के रोंदी

हर इक जुलम दा करदी समाना जे किती पड़ाई हुंदी

शिक्षा नु ओहदा हथ्यार बनाओ जी

तुसी अपनी परी नु आगे तक पढाओ जी

कुडिया ने हर छेत्र विच अपना लोहा मनवाया

कंजक रूप दे विच साडे घर आंदी महामाया

कोई वेअक्ले ध्यानु नु रस्ते पाओ जी

अपनी बिटियाँ नु आगे तक पढाओ जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।