ओ सांवरिया अब तो निहारो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ सांवरिया अब तो निहारो

कब से खड़ा हूं तेरे द्वार...

कौन सुनेगा किस को सुनाऊं,

मैं जग से लाचार

नजरे दया की हमपे करदो मुरारी,

आया हु दर पे तेरे बनके भिखारी ।

तुम सेंठों के सेठ हो प्यारे,

तुमसे बड़ी ना सरकार...

तुमसा दयालु जग मे कौन है प्यारे,

जो जग से हारे बाबा तुमको पुकारे ।

दुखियों के दुखड़े पल मे हरते दयालु,

हम पे भी कर दो उपकार...

जीवन खतम है बस सांस रुकी है,

तुमपर सांवरिया मेरी आस टिकी है ।

दर दर भटकता राजू हार गया है,

हारे का करदो बेड़ा पार...

रचयिता :- राजकुमार सिंह (लोनी)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।