मैया मोरी जग मग ज्योत जले

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया रानी तेरे दरबार में जग मग में ज्योत जले

हो मैया मोरी जग मग ज्योत जले

तू जन नी मैं बालक तेरा जन्मो जन्म का साथ रहे माँ

अपने अंचल की छईयां दे सिर पे सदा तेरा हाथ रहे माँ

जीवन के घने अंधियार में जग मग ज्योत जले

पूत कुपूत है बहुत तेरे मात कुमात ना होती कभी माँ

धरती अमबर चाँद सितारे तेरी दया से रोशन माँ

स्वार्थ से परे तेरे प्यार में जग मग ज्योत जले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।