साईं जी किस विधि तुमको पाऊ

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॥ पावन पाठ ॥

साईं जी किस विधि तुमको पाऊ

किस विधि तुम को पाऊ किस विधि तुम को पाऊ,

चलते चलते पग है हारे द्वार न तेरा पाऊ,

किस विधि तुम को पाऊ किस विधि तुम को पाऊ,

गागर छोटी प्यास बड़ी है

कैसे प्यास बुजाऊ,किस विधि तुम को पाऊ,

गुरु की सेवा सुर की पूजा

साँझ सकारे जाऊ किस विधि तुम को पाऊ,

शरणाघट को शरण लगा लो

दास तेरा कहलाऊ किस विधि तुम को पाऊ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।