ज्योति जगा लो सिर को जुका लो

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ज्योति जगा लो सिर को जुका लो

मन चाहा वर माँ से पा लो मैया दीदार दे रही है

भगतो को प्यार दे रही है

जगराते की रात है आई सारी रात जगाए गे

महारानी को मिल कर के भगतो भजन सुनाये गे

गणेश मना लो वीरा गा लो हाथ उठा के ताली बजा लो मैया दीदार दे रही है

भगतो को प्यार दे रही है

मैया का शिंगार करेगे हम इसनान करवायेगे

हलवा पूरी मेवा मिश्री का हम भोग लगायेगे

चुनरी चड़ा लो माँ को सजा लो सोने का तुम छत्र चड़ा लो

मैया दीदार दे रही है भगतो को प्यार दे रही है

भोर हुई तुम कथा सुनाओ भगतो तारा रानी की

धुप दीप से करो आरती पहाडा वाली रानी की

झोली फेला लो गोदी भरा लो लंगूर इक नो कन्या बिठा लो

मैया दीदार दे रही है भगतो को प्यार दे रही है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।