दिवला जले बोल महारानी

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

दिवला जले दिवला जले बोल महारानी तेरे भवन में दिवला जले

रूम झूम रूम झूम मेघा बरसे

पवन चले पुरवैयाँ महारानी

तेरे भवन में दिवला जले

घूम घूम झूम झूम गणपति नाचे

मुश्क करे ता ता थैयां महारानी

तेरे भवन में दिवला जले

गर गर गर्जन सिंह दहाड़े

नाचत हनुमत वीरा महरानी

तेरे भवन में दिवला जले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।