भवानी तुम्हारी शरण आ गया हु

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हु

बिना भगती के हो गए करम काले

लगाने तुम्ही से लगन आ गया हु

जभी जन्म पाया तभी भव में डूबा मैंने करने को भव से तरन आ गया हु

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हु

कई जन्म पाए कई जोनियो में

खत्म करने आवा गमन आ गया

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हु

चरण चुमते उचे पर्वत तुम्हारे

मैं चढ़ के चडाई कठिन आ गया हु

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।