सीता राम दर्श रस बरसे जैसे सावन की झड़ी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सीता राम दर्श रस बरसे जैसे ससावन की झड़ी

सावन की झड़ी प्यासे प्राणों पे पड़ी

सीता राम दर्श रस बरसे जैसे ससावन की झड़ी

राम लखन अनमोल नगीने अवध अंगूठी में जड लीले

सीता एसी सोहे जैसे मोती की लड़ी

सीता राम दर्श रस बरसे जैसे ससावन की झड़ी

राम सिया को रूप निहारे नाचे गावे सब नर नारी

चल री दर्शन कर आवे क्या सोचत खड़ी

सीता राम दर्श रस बरसे जैसे ससावन की झड़ी

रूम रूम को नैन बना लो राम सिया के दर्शन पा लो

बरसो पीछे आई है ये मिलन की घड़ी

सीता राम दर्श रस बरसे जैसे ससावन की झड़ी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।