चिठिया लै जा ऊधो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चिठिया लै जा ऊधो,जा के कहियो कन्हैया से,बिरहा सहा नही जाए

कैसी है निगोड़ी मेरी हाथ की ये रेखा

रूठे जो कन्हैया फिर मुड़के न देखा

कदम के डार पे खिलता नही है फूल

वृंदावन के गलियों में मिलता नही है धूल

चिठिया लै जा..............

कौन चुराए माखन मोरा

तेरे बिना लगे मोहन जीवन ये कोड़ा

कौन फोड़ेगा मेरा जल की ये मटकी निकसे न तन से प्राण क्यों ये जान अटकी

चिठिया लै जा ऊधो...........

ऊधो जा के कहना हम कुछ न कहेंगे

रूठे जो कन्हैया तो फिर रूठने न देंगे

झूठ भी कहेगा उसे सच मान लेंगे

अब न यशोदा से चुगली करेंगे

चिठिया लै जा ऊधो.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।