दो अनसु बचाए रखना

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॥ पावन पाठ ॥

दो अनसु बचाए रखना

ऐसा हथियार है ये डरती सरकार है ये जो सीधी मैया की भाई दिल दीवार करे

दो अनसु बचाए रखना

यु ही मत खो देना अनमोल खजाना है

इसे रखना बचा के अगर मैया को बचाना है

अनसु की सही जगह चरणों में बहाना है

दो अनसु बचाए रखना

अनसु चड जाते है मैया की निघाहो में,

हरकत कर देते है मैया की बाहों में

ये तुझको बिठा लेंगी अंचल की छाओ में

दो अनसु बचाए रखना

मेरी मैया रानी का बड़ा नर्म कलेजा है

भगतो के लिए माँ को मैंने रोते देखा है

जो हो नही सकता है यहाँ होते देखा है

दो अनसु बचाए रखना

फीका इस के आगे ये बहाव समंदर का

छोटा इस के आगे हथ्यार सिकंदर का

वनवारी भजन फीका भई मस्तकंदर का

दो अनसु बचाए रखना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।