स्वास देना प्रभु इतनी तो कम से कम

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॥ पावन पाठ ॥

स्वास देना प्रभु इतनी तो कम से कम

तुमसे मिलने से पेहले न निकले ये दम,

जो चलाता है ये सारे संसार को मैं भी कर लू जरा उसका दीदार तो

क्या पता फिर मिले न मिले ये जनम

तुमसे मिलने से पेहले न निकले ये दम,

आज जो कुछ भी हु तेरा उपकार है मेरे जीवन का इक तू ही आधार है ,

तेरा करदू अधा शुकरीयाँ कम से कम सेवा

तुमसे मिलने से पेहले न निकले ये दम,

जितनी सेवा तेरी करनी थी वो न की मुह दिखाने की मैं तुझको काबिल नही

फिर भी मुझको यकीन तू करेगा रेहम,

तुमसे मिलने से पेहले न निकले ये दम,

बस इसी आस में बीते जीवन मेरा इक दिन तो प्रभु होगा दर्शन तेरा

कित्नु तरसे तुझे देखने को नैन

तुमसे मिलने से पेहले न निकले ये दम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।