इन आँखों में सूरत है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इन आँखों में सूरत है तेरी मन मन्दिर में मूरत है तेरी

होठो पे है नाम तेरा सांसो में तू है वसा सुन अविनाशी सुन केलाशी

सुन गोरी के भोले पिया

तरीन त्रिगारी तू है तू नील कंठ कहलाये,

पेहनेसर्प की माला और अंग भभूति लगाये

पी के भंग प्याले वर दे डाले ओ गोरी के भोले पिया

इन आँखों में सूरत है तेरी मन मन्दिर में मूरत है तेरी

तू है सब का दाता तू है सब का पालनहारा

तेरी दया का भगवन ना ता है न कोई किनारा

रूप कही छाया सब तेरी है माया ओ गोरी के भोले पिया

इन आँखों में सूरत है तेरी मन मन्दिर में मूरत है तेरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।