इक बात समज न आई ओ बाबा साईं

पारंपरिक
श्री राम भजन साईं भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

इक बात समज न आई ओ बाबा साईं

हिन्दू है मुसल्मा है तू सिख है या असाई,

कभी ज्ञान गीता का हम को सुनाये

तू पूर्वो के कल में कभी गुण गुनाए

कभी पाए फल तेरे हाथो में दिल की

गुरु ग्रन्थ साहिब की बाते तूने की

हैरान है सारी खुदाई

ओ बाबा साईं

इक बात समज न आई ओ बाबा साईं

जश्न ईद का मंदिरो में मनाये दीवाली के मश्जिद में दीपक जलाए

कभी रामा साईं कभी मौला साईं कही अल्लाह साईं कही भोला साईं

तू करीम है या कन्हाई ओ बाबा साईं

इक बात समज न आई ओ बाबा साईं

तू ही जाने बाबा क्या मजहब हा तेरा

क्यों शिर्डी में आ कर लगाया है डेरा

किसी का है रब तू किसी का खुदा है

तू कहता है रब कब खुदा से जुदा है

तेरी बात में है गहराई ओ बाबा साईं

इक बात समज न आई ओ बाबा साईं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।