मोहन प्रेम बिना नही मिलता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोहन प्रेम बिना नही मिलता चाहे कर लो लाख उपाए

मोहन प्रेम बिना नही मिलता

मिले न यमुना सरस्वती में मिले न गंग नहाए

प्रेम सरोवर में जब दुभे प्रभु की झलक लो खाए

मोहन प्रेम बिना नही मिलता

मिले न पर्वत में निर्जन में मिले न वन वर्माये

प्रेम भाग घुमे तो प्रभु को भट में ये पधराये

मोहन प्रेम बिना नही मिलता

मिले न पंडित को ग्यानी को

मिले न ध्यान लगाये ढाई अक्षर प्रेम पड़े तो नटवर नैन समाये

मोहन प्रेम बिना नही मिलता

मिले न मंदिर में मूर्त में मिले न अलख जगाये

प्रेम बिंदु जब दृग से टपके तुरग प्रगत हो जाये

मोहन प्रेम बिना नही मिलता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।