मुझे है काम इश्वर से जगत रूठे तो रुठन दे,

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे है काम इश्वर से जगत रूठे तो रुठन दे,

कुटम्ब परिवार सुख तारा मान धन लाज नोकर की

प्रभु का भजन करने में अगर छुटे तो छुट्टन दे

मुझे है काम इश्वर से जगत रूठे तो रुठन दे,

बेठ संगत में संगत की करू कल्याण मैं अपना

लोक दुनिया के भोगो में मौज लुटे तो लुटन दे

मुझे है काम इश्वर से जगत रूठे तो रुठन दे,

प्रभु के ध्यान करने से लगी दिल में लग्न मेरे

प्रीत संसार विशियो से अगर टूटे तो टूटन दे

मुझे है काम इश्वर से जगत रूठे तो रुठन दे,

धरी सिर पाप की मटकी मेरे गुरु देव ने पटकी

वो बरह्मा नन्द ने पटकी अगर फूटे तो फुटन दे

मुझे है काम इश्वर से जगत रूठे तो रुठन दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।