मैं शिर्डी आ जाऊ

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॥ पावन पाठ ॥

मुझको पंख लगा दे साईं मैं शिर्डी आ जाऊ,

रूप तुम्हारा निहारु निश दिन

तेरा रूप निहारु निष् दिन जीवन सुख पा जाऊ,

मैं शिर्डी आ जाऊ

नाम तुम्हारा जब से सुना है

आस दर्श की जागी

हर दम मेरे मन में साईं तेरी ही लोह लागी

इक बार तो दर्श दिखाओ

भगती तुम्हारी पाऊ,

मैं शिर्डी आ जाऊ

पावन है वो भूमि याहा पर साईं तेरा वासा,

पूरण होती भगत जनों की मन की हर अभिलाशा

अब तो मुझे बुला ले साईं चरण कमल चित लाऊ

गीत तेरे मैं गाऊ

मैं शिर्डी आ जाऊ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।