इक्को ख़ैरियत मंगी तेरी श्यामा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इक्को ख़ैरियत मंगी तेरी श्यामा

जदों भी दुआवा मंगियाँ

तेरी ख़ुशी विच ख़ुशी ख़ुशी जीवा लगियां

निभावा मंगियाँ.

इक्को ख़ैरियत मंगी तेरी श्यामा

चारे पासे तू ही तू दिसदा कुझ होर नजर ना आवे

नाल आसा दे जद प्रीत वे तेरी नजदीक फिकर न आवे

सुख दुनिया दे सब ने मिटटी वर्गे गुण चीर सबर न आवे,

मुड मुड आवे की मेरी जुबा ते तेरा नाम अगर ना आवे

तेरी ख़ुशी विच ख़ुशी जीवा

लगियां निभावा मंगियाँ

इक्को ख़ैरियत मंगी तेरी श्यामा

धर्म न जानू सत्कर्म न जानू ना पूजा पाठ इभादत तू मेरा है बस इतना ही जानू

सपना ही है हकीकत

अंग संग तू है फिर क्या मैं चाहू

कोई और न बांकी हर्स्रत दूर न करना मजबूर न करना

मिनत है यही है मन्नत

तेरी ख़ुशी विच ख़ुशी जीवा

लगियां निभावा मंगियाँ

इक्को ख़ैरियत मंगी तेरी श्यामा

तेरी ही ख़ुशी दे विच साडिया वे खुशिया रजा विच तेरी ही मैं राजी हो चुकी आ

सुख आपने मैं वारे सब तेरे तो

तेरियां बलामा मंगियाँ

तेरी ख़ुशी विच ख़ुशी जीवा

लगियां निभावा मंगियाँ

इक्को ख़ैरियत मंगी तेरी श्यामा

जिस जिस पल तेनु भूल के भूली मैं हुँदै सुन्दे सब कुझ कखा वांग रुली मैं

गुनागार जान साहिल खुद नु डांडिया सजावा मंगियाँ,

इक्को ख़ैरियत मंगी तेरी श्यामा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।