नाम तुम्हारा नाथ दयालु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नाम तुम्हारा नाथ दयालु मैं इक दीं भिखारी हु

तुम तो चतुर खिलाड़ी भगवन मैं इक जीव अनाडी हु

मेरे जैसे लाखो तुम को मेरे केवल इक तुही

तुम तो हो संसार के मालिक मैं निर्बल संसारी हु

मैंने ज्योत जाई तुम्हरी मैने तुम्हारा नाम लिया

वो भी केवल स्वार्थ के वश ऐसा मैं व्यपारी हु

नाम तुम्हारा नाथ दयालु मैं इक दीं भिखारी हु

खीच रहे है व्यसन मुझको रेन दी वस् अपनी ही और

मैं भी उनके वश में हु प्रभु पापी हु तू विचारी हु

लाखो वेचारो को तूने ही अपना दिया सहारा है

मुझको भी अपनाओ प्रभु जी मैं भी भगत वेचारा हु

नाम तुम्हारा नाथ दयालु मैं इक दीं भिखारी हु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।