आंखों से ओझल नहीं होती

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आंखों से ओझल नहीं होती सुंदर सूरत प्यारी

एसा सांवला सलोना यशोदा का मनमोहना देखे सब नर नारी

आंखों से ओझल नहीं होती

कभी गैयाँ वो चराए कभी बंसी भ्जाये,

कभी झूमे नाचे गाये लीला अजब न्यारी

आंखों से ओझल नहीं होती

छोटे बड़े ग्वाल बाल देखे कान्हा का कमाल

छेड़े ऐसे सुर ताल करदे सब को निहाल

सूद बुद बिसरे सारे

आंखों से ओझल नहीं होती

कभी लुक छुप जाए कभी मैया को दोडाये

कभी माखन चुराए खूब खाए और खिलाये देखे नगरी सारी

आंखों से ओझल नहीं होती

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।