तुम बिन सांवरिया दिल न लगे रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुम बिन सांवरिया दिल न लगे रे

दिल दिल लुटा है चित चोर

खावो में भी न चैना मिले रे दिल लुटा है तूने चित चोर

देखा तुझे तो हो गई वन्वारियां खाबो में तेरे खो गई सांवरियां

तुमरे मिलन को व्याकुल हुई रे दिल लुटा है तूने चित चोर

तुम बिन सांवरिया दिल न लगे रे

तुम्हरी गली में दिल मोरा अटका

यही कही पर मन मोरा भटका

मुड मुड़ के देखू तू न दिखे रे

दिल लुटा है तूने चित चोर

तुम बिन सांवरिया दिल न लगे रे

छिप छिप के मुरली यु न बजाओ

दूर खड़े यु न मुश्काओ

मुरली बजाके यु मुस्का के

दिल लुटा है तूने चित चोर

तुम बिन सांवरिया दिल न लगे रे

तुम को पुकारे आओ संवरिया,

हम को भी दिल से लगाओ सांवरियां

देखे शिवम् यु तुम को ही प्यारे

दिल लुटा है तूने चित चोर

तुम बिन सांवरिया दिल न लगे रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।