मोहन तेरी मुरली ने जादू कर दिया मैं तो सुध बुध अपनी बुली

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी मुरली ने जादू कर दिया मैं तो सुध बुध अपनी बुली रे

मोहन तेरी मुरली ने जादू कर दिया मैं तो सुध बुध अपनी बुली

माखन मिश्री खावे मोहन करके कोई बहाना

विष्णु के अवतारी है ये देवो ने भी माना

जय हो सुदर्शन धारी तेरी महिमा जग से न्यारी

मोहन तेरी मुरली ने जादू कर दिया मैं तो सुध बुध अपनी बुली

सुन मुरली की तान रे कान्हा मन न लागे मेरो घर में

मात पिता मेरे पुशन लागे खड़ी हो किस चकर में

मैं तो मुरली के रंग में खो गई रे कान्हा

मोहन तेरी मुरली ने जादू कर दिया मैं तो सुध बुध अपनी बुली

गाल बाल संग बेठ के कान्हा मुरली मधुर बजाए

गोपिया खुश है ग्वाले खुश है एसी तान सुनाये

मैं तो झुला प्रेम का झूली रे कान्हा

मोहन तेरी मुरली ने जादू कर दिया मैं तो सुध बुध अपनी बुली

काली नाग को नाथ की तूने लीला अजब दिखाई

ऊँगली पे उठा इया पर्वत लीला अजब दिखाई

फिर जय जय ब्रिज में होली रे जग ब्रिज में होली

मोहन तेरी मुरली ने जादू कर दिया मैं तो सुध बुध अपनी बुली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।