मेरे दाता के दरबार में सब का खाता है

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरे दाता के दरबार में सब का खाता है

जितना जिसके भ्ग्ये में लिखा उतना पाता है,

मेरे दाता के दरबार में सब का खाता है

क्या साधू कया संत गरस्थी क्या राजा क्या रानी

प्रभु की पुस्तक में लिखी है सब की कर्म कहानी

सब ही के वो जमा करज का सब ही हिसाब लगाता

मेरे दाता के दरबार में सब का खाता है

बड़े बड़े कानून प्रबु के बड़ी बड़ी मर्यादा

किसी को कोडी कम नही देता किसी को दमड़ी ज्यादा

इसलिए वो इस दुनिया में जगत से अट कहलाता

मेरे दाता के दरबार में सब का खाता है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।