मैं पलकन डगर बुहारू

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मैं पलकन डगर बुहारू आज मेरे राम आवेगे

मैं नित नित राह निहारु आज मेरे राम आवेगे

राम आवेगे मेरे प्रभु राम आवेगे

मैं पलकन डगर बुहारू आज मेरे राम आवेगे

जन्म बिताया राह तकती फिर भी नैना नहीं हिया थकते,

राम नाम का सुमिरन मेरे रोम रोम है हर पल करते

मैं नित नित डगर पुहारु आज मेरे राम आयेगे

बचपन बीता योवन बीता बीता जाए बुढापा

रामकी धुन में मन तो खो बेठी हु मैं तो अपना आपा

मैं नित नित राह निहारु आज मेरे राम आयेगे

सुल हटा कर फूल बिछाए ना जाने कब रघुवर आये मीठे वेर रखे चख चख कर

जो बगियाँ से चुन चुन लाये

मैं पल पल राम पुकारू आज मेरे राम आवेगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।