छुपा लो यु दिल में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छुपा लो यु दिल में प्यार मेरा.

के जैसे मंदिर बिना दीये के

तुम अपने चरणों में रखलो मुझको

तुम्हारे चरणों का फूल हु मैं

मैं सिर जुकाए खड़ी हु प्रीतम

के जैसे मंदिर बिना दीये के

य सच है जीना था पाप तुम बिन

ये पाप मैंने किया है अब तक

मगर है मन में छवि तुम्हारी

के जैसे मंदिर बिना दीये के

फिर आग विरहा की मत लगाना के जल के मैं राख हो चुकी हु,

ये राख माथे पे मैंने रखली

के जैसे मंदिर बिना दीये के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।