छवि देखि अजब हमने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छवि देखि अजब हमने मदन मोहन मुरारी की

है उसका चाँद सा मुखड़ा नजर तिरशी कटारी सी,

बड़े नैना है मत वाले है सिर पे केश घुंगराले,

हो जैसे छाए अम्बर में कही पे मेघ हो काले

बसी नैनो में सूरतियाँ उसी बांके बिहारी की,

है उसका चाँद सा मुखड़ा नजर तिरशी कटारी सी,

छवि देखि अजब हमने मदन मोहन मुरारी की

मुकट हो मोर माथे पे है कंगन हाथ में साजे,

पीताम्भर है कमरिया में पायलियाँ पाओ में साजे,

नुरानी रूप है पाया निगाहों में खुमारी सी,

है उसका चाँद सा मुखड़ा नजर तिरशी कटारी सी,

छवि देखि अजब हमने मदन मोहन मुरारी की

नशीले कान में कुंडन मधुर मुरली बजाते है,

फिजाये झूम उठती है जब वो मुस्कुराते है ,

वसाई मन में केवल में छवि वो प्यारी प्यारी सी,

है उसका चाँद सा मुखड़ा नजर तिरशी कटारी सी,

छवि देखि अजब हमने मदन मोहन मुरारी की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।