रबा मेरेया मेरे हाल दा मेहरम तू

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

रबा मेरेया मेरे हाल दा मेहरम तू अन्दर तू ऐ ते बहार तू,

रोम रोम विच तू

रबा मेरेया मेरे हाल दा मेहरम तू

तू है ताना तू है भाना सब किश मेरा तू

रबा मेरेया मेरे हाल दा मेहरम तू

कहे हुसैन फ़कीर निमाना

मैं न ही सब तू

रबा मेरेया मेरे हाल दा मेहरम तू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।