नैया पड़ी मजधार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नैया पड़ी मजधार ओ मैया रानी पार करो

पार करो मैया पार करो

नैया पड़ी मजधार ओ मैया रानी पार करो

मन मुर्ख अज्ञानी मोरा जान ना पाया भेद ये तोरा

झूठा सब संसार ओ मैया रानी पार करो

नैया पड़ी मजधार ओ मैया रानी पार करो

झूठा है ये जग का सपना झूठा है ये तन मन अपना

जीना है दिन चार ओ मैया रानी पार करो

नैया पड़ी मजधार ओ मैया रानी पार करो

तू ही दुर्गा तू ही काली तू संतोषी माँ रखवाली

ममता का भंडार ओ मैया रानी पार करो

नैया पड़ी मजधार ओ मैया रानी पार करो

इत उत भटके मन का पंशी टूटी नैया रूठा माझी कौन लगाये पार

ओ मैया रानी पार करो

नैया पड़ी मजधार ओ मैया रानी पार करो

हर संतोषी मैया रानी सुनलो पीड़ा मात भवानी,

करे शंकर माँ पुकार ओ मैया रानी पार करो

नैया पड़ी मजधार ओ मैया रानी पार करो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।