चलो मन वृंदावन की और

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चलो मन वृंदावन की और

प्रेम का रस याहा छलके है,

कृष्ण नाम से भोर,

चलो मन वृंदावन की और

भगती की रीत याहा पल पल है प्रेम प्रीती की डोर,

राधे राधे जपते जपते दिख जाए चितचोर,

चलो मन वृंदावन की और

वन उपवन में कृष्ण की छाया शीतल मन हो जाए,

मन भी हो जाए यती पावन कृष्ण किरपा जो पाए,

दास नारायण शरण तुम्हारी किरपा करो इस और

चलो मन वृंदावन की और

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।