राम को प्यारी मैं हु श्याम को प्यारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राम को प्यारी मैं हु श्याम को प्यारी,

रूप हु माँ का मैं हु दोलत तुम्हारी,

सीने पे फिर क्यों मेरे चलती है कटारी,

भूल गये क्या मैंने तुम को दूध दही और माखन दिया है

तुम्हारे नजर के समाने देखो छनी छनी मेरा तन किया है,

तुम पर ये अगर विपता आती सच मानो मैं दोडी आती,

तोड़ के रसमें सारी,

राम को प्यारी मैं हु श्याम को प्यारी,

पहले उबलता पानी डाले फिर चमड़ी को शीड उतारे,

मौत से पहले की वो कहानी

कैसे कहू मैं अपनी जुबानी

सोचु यम की है परछाई देता है देखाई जब वो कसाई जपु राम वनवारी,

राम को प्यारी मैं हु श्याम को प्यारी,

मैं हु गुणों का इक खजाना पर निर्मोही जग न जाना,

प्रीत पराई जान गई मैं सब को अब पहचान गई मैं

सुन संजीव रे मेरी सदाए पत्थर भी अब नीर बहाए

समजो मेरी लाचारी,

राम को प्यारी मैं हु श्याम को प्यारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।