हे भय भंजन जन सुख़ रंजन

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

हे भय भंजन जन सुख रंजन:

हे भय भंजन जन सुख रंजन,

समय की यहीँ पुकार,

संजीवनी लाओ फिर इक बार,

हे भय भंजन------

कोरोना संकट है अति भारी,

वैश्विक बिपदा जटिल बिमारी,

लाय संजीवनी प्राण बचाओ,

मचा है हाहाकार,

संजीवनी लाओ फिर इक बार,

हे भय भंजन------

हे महावीर विक्रम बजरंगी,

तुम बिनु और कोऊ ना संगी,

धाय धवल गिरि बूटी लाओ,

सुन लो करुण पुकार,

संजीवनी लाओ फिर इक बार,

हे भय भंजन------

नासो रोग हरो सब पीरा,

हे दुःख भंजन हनुमत वीरा,

तोहें शपथ श्री रघुनाथ की,

सकल जग कर उद्धार,

संजीवनी लाओ फिर इक बार,

हे भय भंजन--------

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।