पौनाहारी तेरी होवे जय जय कार

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पौनाहारी तेरी होवे जय जय कार

मेरे दूधाधारी तेरी हॉवे जय जय कार,

छोटी उमर योग कमा लेया,

कलयुग विच बाल रूप च आ गया

ओ शिव शंकर अवतार

मेरे पौनाहारी तेरी होवे जय जय कार

शाह्तालियाँ तू डेरा लाया

माँ रत्नों दातू लाल कहाया,

ओ शिव शंकर अवतार,

मेरे पौनाहारी तेरी होवे जय जय कार

जो बी तेरे दर ते औंदा,

म्न्गियाँ मुरादा पुरिया पाउंदा,

जोगी पूरण करदा काज,

मेरे पौनाहारी तेरी होवे जय जय कार

शिवांक ते अपनी रहमत बर्सादे

उसदा वेडा पार लगादे,

रखी भगता दा तू ध्यान,

मेरे पौनाहारी तेरी होवे जय जय कार

लेखक शिवांक कालिया

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।