सागर तट पर बेठ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सागर तट पर बेठ अकेले रट ता तेरा नाम,

कब आएगा तू गिरधारी देर हुई घनश्याम

सागर तट पर बेठ अकेला रट ता तेरा नाम,

करता पल पल तेरा वंदन युग युग का प्यासा मेरा मन

भूल हुई क्या मुझसे मोहन तोड़ दिया तुमने मेरा मन,

करले अब सवीकार मुरारी तू मेरा परनाम,

कब आएगा तू गिरधारी देर हुई घनश्याम

सागर तट पर बेठ अकेला रट ता तेरा नाम,

बहुत हुआ ये खेल तमाशा अब तेरे चरणों की आशा,

सुन ने को वेह तान मधुर फिर तरस रहे है कान भी

डर है दर्शन बिन जीवन की ढल न जाए शाम,

कब आएगा तू गिरधारी देर हुई घनश्याम

सागर तट पर बेठ अकेला रट ता तेरा नाम,

चारो और घिरे अंधियारा नाथ ना अपना एक सहारा,

दया दृष्टि प्रभु अपनी करदो,

जो कुछ सेवा का वर दो ,

सुधि पतवार पकड़ खिताने नैया आठो याम,

कब आएगा तू गिरधारी देर हुई घनश्याम

सागर तट पर बेठ अकेला रट ता तेरा नाम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।