गजब की रचना तेरी है रचना कार

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॥ पावन पाठ ॥

गजब की रचना तेरी है रचना कार,

सब को आकार देकर खुद रहा नीरा कार,

गजब की रचना तेरी है रचना कार,

इतने चेहरे है किस को तेरे जैसा संजू,

कितने जग है लेकिन है कहा मगर तू,

सब को भंडार दे कर खुश रहा सरकार,

गजब की रचना तेरी है रचना कार,

मनत पूरी हो उसकी जो भी तुझे पुकारे,

धरती आकाश पवन सब तूने है बनाये,

सब को घर बार देकर खुद का कहा घरवार,

गजब की रचना तेरी है रचना कार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।