जहा तक असर है वाहा तुम ही तुम हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जहा तक नजर है वाहा तुम ही तुम हो ,

की पहले भी तुम थे के तुम बाद में ही

याहा तक उमर है वाह तुम ही तुम हो

धरती में अम्बर में नदियों में सागर में

सूरज की गर्मी में कलियों की नरमी में,

तारो की बस्ती में लहरो की मस्ती में,

मोसम की धडकन में लम्हों की थिरकन में,

जहा तक असर है वाहा तुम ही तुम हो ,

जहा तक नजर है वाहा तुम ही तूम हो

जहा तक डगर है वाहा तुम ही तुम ही

रिश्तो में नातो में सपनो की रातो में ,

आशा निराशा में दिल की दिलाशा में,

भावो के बंधन में खुशियों के आंगन में,

जीवन के वर्षो में अटके संगर्शो में

जहा तक असर है वाहा तुम ही तुम हो ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।